Sunday, 21 February 2010

रंग बिरंगी होली का यही तो है संदेश

ऐसे रंग में क्‍या रंगा, स्‍वयं हुए बदरंग।
प्रेम रंग सांचा 'रसिक' जीवन भरे उमंग।।

रंगी हथेली ले बढे,चेहरा रंगा उजास।
सच्‍ची होली हो तभी, फैले प्रेम प्रकाश।।

लाल लाल उडने लगी , चारो ओर गुलाल।
शहर शहर बाजार से, गांव गांव चौपाल।।

जल में जैसे रंग घुला, एक हृदय हो मीत।
वैमनस्‍य मिट जाए सब , रहे मित्रता जीत।।

चमक रही आभा लिए, जैसे रजत अबीर।
समता बढे समाज में , निर्धन बन अमीर।।

लेखक ... संत कुमार टंडन 'रसिक' जी

7 comments:

डॉ. मनोज मिश्र said...

लाल लाल उडने लगी , चारो ओर गुलाल।
शहर शहर बाजार से, गांव गांव चौपाल।।
vaah,behtreen.

M VERMA said...

जल में जैसे रंग घुला, एक हृदय हो मीत।
वैमनस्‍य मिट जाए सब , रहे मित्रता जीत।।
सुन्दर कामना
इस कामना में मुझे भी शामिल कर लें

राकेश जैन said...

ati sundar rachna, ati sundar bhav,
Holi ke parv par, sabhi mil jao...

Badhai!!

RaniVishal said...

Bahut sundar rachana ....padawaane ke liye aapka bahut bahut aabhar!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बहुत सुंदर रंग है ये भी :)

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर लगे आप के यह रंग. धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!! वाह!

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