Monday, 23 November 2009

बच्‍चों के जन्‍मोत्‍सव की भारतीय पद्धति क्‍या है ??

हमारे भारतीय संस्‍कार में भी जन्‍मदिन मनाने की परंपरा रही है। श्री रामनवमी , हनुमान जयंति , कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी आदि उत्‍सव से हमें उनके उत्‍तम गुणों करे जीवन में धारण करने की सीख मिलती है। बालको का जन्‍मदिन मनाना उनके मनमस्तिष्‍क में सद्संस्‍कार उत्‍पन्‍न करने का एक स्‍वर्णिम अवसर है। पर 'तमसो मा ज्‍योतिर्गमय' कहने वाली हर पर्व पर दीए जलाने वाली हमारी संस्‍कृति के विपरीत पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति का अंधानुकरण कर हम जन्‍म दिवस पर जलती हुई मोमबत्तियां फूंक फूंक कर बुझा देते हैं और तेज का नाश कर अंधेरे की ओर जाने की मूर्खता करते हैं। हर पर्व में कण कण को एकत्र कर लड्डू बांधने की सभ्‍यता को छोडकर जन्‍मदिन समारोह में केक काटने का आदर्श रखते हैं। भगवद् स्‍तोत्रो के शुभ मंगलोच्‍चार के स्‍थान पर 'हैप्‍पी बर्थ डे टू यू' जैसे शुष्‍क शब्‍दों को अपना लेते हैं। हमारी परंपरा के अनुसार जन्‍मदिन में दान और त्‍याग का महत्‍व है , जबकि बालको के सामने वह आदर्श न रहकर उपहारों का संग्रह करने का बढावा मिलता है।

आइए हम सब मिलकर अपनी भारतीय परंपरा के अनुसार जन्‍मदिन मनाएं और अपने बालकों को सुसंस्‍कारित करें। जिस बालक का जन्‍मदिन हो , उसे नए कपडे पहनाकर उसके द्वारा इष्‍टदेव की पूजा करवाएं एवं हाथ जोडकर प्रार्थना करवाएं। उसके पश्‍चात् परिवार की माता या बहन एक थाली में प्रज्‍वलित दीप , साबुत सुपारी , कपास , चावल , पुष्‍पमाला, मिठाई सजाकर बालक की आरती उतारें। सर्वप्रथम बालक के मस्तिष्‍क पर रोली से तिलक लगाकर अक्षत लगाएं, फिर सिर पर बारी बारी से कपास , दुर्वा , सुपारी उसके मंगल की कामना करें। फिर दीप से उसकी आरती उतारें।बालक को माला पहनाते हुए उसके जीवन को फूलों जैसा बने रहने की कामना करे। अंत में मिठाई से बालक का मुंह मीठा करते हुए यह मंगल कामना करें कि यह बालक अपनी मधुर वाणी से सबका प्रिय बनें। जन्‍मदिन के लिए एक हिन्‍दी गीत यहां प्रस्‍तुत है...........

सुदिनं सुदिनं जन्‍मदिनम् तव, भवतुमंगलम् जन्‍मदिनम्।
विजयी भव सर्वत्र सर्वदा , जगति भवतु तव सुयशोगानम्।।

इस गीत के पश्‍चात् सभी बडों का प्रणाम करके बालक आशीर्वाद प्राप्‍त करे और सभी उपस्थित लोगों को अपने हाथ से मिठाई और अल्‍पाहार दे। इस दिन गरीबों और अनाथों को भी बच्‍चे के अपने हाथ से कुछ न कुछ दान करवाएं , तभी हमारे भारतीय संस्‍कार बच्‍चे में आ सकते हैं।

( लेखिका .. श्रीमती निर्मला जी , कोटा)




8 comments:

Udan Tashtari said...

जी, जैसा आदेश!!

खुशदीप सहगल said...

जन्मदिन पर भव्य आयोजनों या सरप्राइज़ पार्टियों की जगह कभी अनाथालय, वृद्धाश्रम, कुष्ठ आश्रम आदि जाकर ज़रूरतमंदों के मुंह में एक निवाला डाल कर देखें कभी...फिर देखिए उनके चेहरों पर पल भर की खुशी...वो जो आपको दुआएं देंगे, वो ज़रूर असर दिखाएंगी...एक बार करके तो देखिए...

जय हिंद...

पी.सी.गोदियाल said...

अच्छी जानकारी ! मगर हैपी बर्थडे टू... बोलना आसान सा लगता है जुबान को !

रंजन said...

अगली बार एसा सही....

संगीता पुरी said...

गोदियाल जी , इतना भी तो कह सकते हैं ....
सुदिनं सुदिनं जन्‍मदिनम् तव !!

Nirmla Kapila said...

बहुत अच्छी लगी ये पोस्ट शुभकामनायें

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सही कहा कोशिश करेंगे अगली बार से इसी तरह करने की शुक्रिया

डॉ टी एस दराल said...

अच्छी जानकारी, संगीता जी। बच्चों को संस्कार बड़ों द्वारा ही दिए जा सकते हैं।

संगीता जी, माफ़ी चाहता हूँ। गलती से ग़लत बटन दबने से आपकी टिपण्णी डिलीट हो गई।
हालाँकि गलती क्षमा योग्य नही है, फ़िर भी हो सके तो दोबारा भेज देंगे तो अच्छा लगेगा।
आभार ।

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