मंगलवार, 13 जुलाई 2010

खत्रियों के अल्‍ल ( अ से आ) ...खत्री हरिमोहन दास टंडन जी.

अंखोर , अंगदा , अंगिए , अंघिया ,अंचल , अंचूरिया , अंजानी , अंटालमर , अंटिया , अंठरेजा , अंतिया , अंद , अंदरानी , अंदेमानी , अंधार , अंधिया , अंब , अंबरीष , अंबाट , अंबे , अंबेकर , अंबेद , अइतार , अइनमार , अइमर , अकरा , अकरे , अकल , अकारी , अकोला , अक्‍कल , अखि , अखेजे , अगनारा , अगरी , अगिया , अग्‍गेचल , अग्निलाय , अग्‍यल , अग्रवाल , अघिरा , अघेले , अचरू , अच्‍छपरानी , अछपानेवामा , अछपोजानी , अजमाती , अजमानी , अजमाशी , अजरी , अझाली , अतई , अताई , अतद , अताद , अतरोवा , अथडेजे , अथणि , अथनी , अंथानी , अथिया , अदैन , अधमाखे , अधराने , अधरेजे , अधीरा , अनंद , अनचुरी , अनजानी , अनजाने , अनथाना , अनदाणी , अनपबो , अनवसता , अनादि , अनी , अनु , अनुस , अनूसा , अनेजा , अपत , अपन , अपनेजे , अपरिये , अपहोन , अपोत्रा , अप्‍पल , अप्‍पयं , अबयाये , अवराने , अवरानी , अववा , अवहरे , अवायवादी , अभट , अभ्‍वानिये , अमठ , अलत , अमती , अमरीया , अमीन , अम्‍गा , अयत , अरंगवरंग , अखाल , अरसिद्दी , अरिन , अरैलत , अरोमत , अदैन , अवैल , अलका , अलख , अलग , अलमंग , अलवंद , अलवचे , अलावाधी , अलिया , अलाशघे , अवई , अवट , अवत , अवधूत , अवर , अवरोह , अवलसे , अवलिस , अवसाही , अव्‍वल , असरापो , असरानी , असरो , असल , असलअदवा , असलाचिनवा , असौर , असीचे , अस्‍ताबाधी , अहूजा , अहोजा , आधमाली , आईनगर , आतू , आद , आदिआतू , आनंद , अनद , आनी , आबी , आमरे , आरोडा , आलिया , आबंद , आवशाही , आवीराय , आशरा , आश्‍रा , आसनी , आसा , आहरी ।








शनिवार, 10 जुलाई 2010

khatri surname list

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खत्री हरिमोहन दास टंडन जी

भारत का प्राचीन इतिहास आर्यों का इतिहास है और निस्‍संदेह खत्रियों के अंदर आर्य रक्‍त हैं। उत्‍तर भारत में खत्रियों के राज्‍य का विस्‍तार चारो ओर फैला हुआ था , परंतु उसका मुख्‍य केन्‍द्र पंचनद तथा गंगा यमुना का क्षेत्र था। उनके पुरोहित सारस्‍वत ब्राह्मण थे। संस्‍कृत का ‘क्ष’ प्राकृत और अपभ्रंश में ‘ख’ हो जाता है , जो करिदेश्‍वर ऋषि , वररूचि और हेमचंद्र के ग्रंथो से प्रमाणित है। पं हरिश्‍चंद्र शास्‍त्री , पं श्‍याम चरण शास्‍त्री , श्री तलवादमे , मि जे सी नेसफिल्‍ड , मि सी एच इलियट , सर जॉर्ज्‍ कैम्‍बल , मि ए एच विल्‍सन , आदि विद्वानों का मत है कि खत्री क्षत्रिय ही हैं और यह एक सैनिक जाति है।


विदेशियों के आक्रमणों को सबसे अधिक पंचनद प्रदेशों को ही झेलना पडा और इतिहास साक्षी है कि उन्‍होने वीरता पूर्वक देश की रक्षा के लिए युद्ध किया। परंतु खेद है कि वे संगठित नहीं हो सके और आपस की फूट के कारण असफल भी रहें। फलत: उस प्रदेश के निवासी समय समय पर भारत के अन्‍य प्रदेशों में प्रवास कर गए। जो पहले गंगा यमुना के किनारे किनारे कलकत्‍ते तक फैलते गए , वे पूर्विय खत्री कहलाए। और जो बाद में अपने प्रदेश से निकले , वे पछिए कहलाए। इसी प्रकार आगरेवाले , दिल्‍लीवाले , लाहौरिये आदि उपभेद बनते चले गए। राजस्‍थान और गुजरात में बसनेवाले ब्रह्मक्षत्रिय के नाम से विख्‍यात हुए। दक्षिण भारत में सहस्रार्जुन प्रसिद्ध सम्राट हुए हैं , उनके वंशज अपने को सोमवंशीय सहस्रार्जुन खत्री कहते हैं। यह ध्‍यान देने योग्‍य बातें हैं कि ब्रह्मक्षत्रिय और सहस्रार्जुन क्षत्रिय अपने विभेद का कारण प्रसिद्ध परशुराम जी को मानते हैं।

जैसे जैसे खत्री भारत के विभिन्‍न प्रदेशों में बसते गए , वैसे वैसे उन्‍होने स्‍थानीय रीति रिवाजों , व्‍यवहार और व्‍यसाय को अपनाना शुरू किया। इस तरह उनकी अनेक उपजातियां बन गयी। व्‍यवसाय , युद्धकौशल , विभिन्‍न धार्मिक संप्रदायों के प्रति आस्‍था और रहन सहन की विशेषताओं के उपजातियों के नामकरण होते गए , साथ ही सामाजिक प्रतिष्‍ठा और स्‍वाभिमान के कारण कुछ अपने को श्रेष्‍ठ समझने लगे। ऋषि परंपरा के गोत्र भी विभेद का कारण बने। खत्री जाति के उपभेदों को ‘अल्‍ल’ कहते हैं। अल्‍लों की उत्‍पत्ति का कुछ कारण ज्ञात है और कुछ अनुमानित , इसमें बहुत शोध होना आवश्‍यक है।

स्‍वाभाविक है कि भारतवर्ष के विस्‍तृत भूमि पर फैले खत्रियों का परस्‍पर परिचय और संपर्क भली भांति नहीं हो पा रहा था। यातायात के साधनों तथा पत्र पत्रिका पुसतकों की सुलभता की वृद्धि के साथ साथ अब संपर्क सूत्र बढ गया है। वर्तमान युग के सिद्धांतों के प्रभाव से उच्‍च नीच की भावना समाप्‍त हो गयी है। परस्‍पर उपजातियों में विवाह संबंध हो रहे हैं। पहले ढाई घर , चार घर , बारह घर , बावन जाति , सुखरान , सिखरा , सरीन , गुजराती , बहुजाति , ब्रह्मखत्री आदि का जो भेदभाव था , वह मिट रहा है। अत: अगले अंक में खत्रियों के अल्‍लों की सूचि कोष के क्रमानुसार ही दी जा रही है। इसमें अनेक भूल भी हो सकती है , क्‍यूंकि इस प्रकार का कोई अखिल भारतीय प्रयास नहीं होने के कारण जानकारी अभी अधूरी ही है। आशा है , भविष्‍य में खत्रियों के अल्‍लों की उत्‍पत्ति , व्‍यू‍त्‍पत्ति , विस्‍तार और विभेदों पर शोधकार्य किसी विद्वान के द्वारा किए जाने से पूरी जानकारी उपलब्‍ध हो सकेगी।






मंगलवार, 6 जुलाई 2010

अरोड वंश की कुल 962 अल्‍लों का संकलन किया जा सका है( भाग - 7) ... खत्री सोहन लाल बजाज



य , र ल , व , श ,ष , ह से शुरू होनेवाले अल्‍ल .... 

रसेवट , रतरे , रखीजे , रंगबुल , रहूजा , रतेजा , रसेजा , रडी , रडवोहरे , रतवानी , रपकजी , रखेला, रलवाईये , राजपाल , रामगदी , रावल , राजाणी , राहीजी, रारिये , रायेमानवी , राजदे , रामगढिया , राममलाणी , रूखे , रूठीजे , रेलन रेली , रूमेला , रूरेजा , रहेजे , रचपातूनी , रमली , रचासोश्‍यानी , रहानिये , रमाई , रखरेजे , रढीजे , रजवानिये , रबारे , राजानी , राजबे , रायजेबी , राजोये , रादोढा , राजवेडा , रामदेव , रायवाला , रिछपाल , रिछपटोदा , रेवडी , रोकवाये , रोडी , रोडीराम , रोसीधारने , लकडे , लगांनी , लखानी , लंगड , लटानी , ललते , लहीजे , लखिये , लखीजे , लडानिये , लखडी , लमल्‍ली , लाखडे , लातीपाल , लुंड , लूथडा , लल्‍ले , लुघेरे , लूम्‍बड , लूमडे , लुलेजे , लूनिये , लेखडे , लेई लोटे , लोची , लोहाणे , लोहिये , लोपाल , लोगन , लाखेडा , लवाणी , लूठेडा , वकवादे , वरपाली , वधवे , वढखाने , वढेरे , वत्‍ते , वरमानी , वजसीजे , वनोचे , वरदाऊ , वल्‍हीटीयर , वनतरेज , वझारे , वलीजे , वमरेजे , वहेड , वधरानी , वतानरेजे , वतराने , वदइये , वखावने , वलडी , वटारे , वतरेजे , वधीजे , वखेडे , ववीजे , वयानी , वलवेच , वडेरे , वातराने , वाधवा , वरोजा , वालदेव , वासन , वोगर , वेनीवखाली , वेहखाने , विरोजा , वेटा , वधेला , वैड , वाघवानी , वलेगा , विरमानी , शक्‍करसिंघे , शेगरी , शोरे , सपडे , सखरे , सबाटिया , सुघवानिये , संगीलोडी , संडोजे , सघवरे , सहबाई , सगाई , सवारेजई , सटोपा , सचदेव , सपरेचा , संगोटिये , सला , संदेशी , सठखेरे , संगी , सजेया , सडाने , सचदेवा , सती , सजा , सव्‍वानी , सदा , सतीजे , सनीजे , सबेड , संघोज , सलूजे , सहूरिये , सखीवोटी , सावरी , साखपूरिये , सीकरी , सिक्‍के , सघूरिये , सुवंगी , सूरी , सुखीजे , सूतडे , सुनता , सुगंधा , सेठी , सेतिये , सोनी , सोढी , सोभरेजे , सोसाडीन , सोढा , सतीजा , सिंगी , सिधवानी , सुदाना , हजरती , हंस , हफदमी , हडे , हंडोजे , हडप , हहोजे , हरयानी , हरणी , हरनेजे , हतिया , हरमेजे , हरली , हुंडिया , हरेजा , हदिया , हाडी , हिंदयानी , हिंडुजा , होडिय , होकडे , होडा , होजे , हुंडे।






गुरुवार, 1 जुलाई 2010

अरोड वंश की कुल 962 अल्‍लों का संकलन किया जा सका है( भाग - 6) ... खत्री सोहन लाल बजाज



पवर्ग से शुरू होने वाले अल्‍ल .............

पसरीचे , पवेजे , पनबाटी , पपडेजे , पंचनदे , परूथी , पजांचे , पजांजही , पंचरदे , पजंमने , परेयानी , पनेरट , परचंडा , पंजे , पडतने , पनवानी , पहजा , पयलठे , पालसिया , पाहोय , पायेहजी , पाहूजे , पातलिया , पुनतेजे , पुजारे , पुलपलेजेते , पुछी , पीडी , पेलानी , पोपले , पोपलाया , पोजे , पोपा , पोहली , पोतरे , पुणेजा , पटोदी , पमणोजा , पास्‍तोला , पाण्‍पोला , प्रियलाझी , पधीजा , फतोहे , फडके , फुटेले , फुलचढा , फोबचे , फलानी , फेरिया , फासेला , बतरे , बठले , बडेजे , बजाज , बब्‍बर , बरेज , बगाई , बदबेजा , बदानी , बाघले , बांबरी , बांगे , बुट्ढी , बेराया , बुधरेजे , बलुजे , बड्यानी , बर्मन , बडतने , बनेले , बलवानी , बलन्‍दी , बाचला , बदेराजे , बहदानी , बलाने , बबेजे , बग्‍गे , बेगानिचा , बलूचे , ब्रह्मवर , बागीचा , बायड , बबेजी , बुधेजा , बांदे , बांगपालिये , बाजूनेंगे , बिहीजे , बिल्‍ल , बागवाती , बोटी , बेहड , बोटे , बोगरे , बोहरा , बटीक , बजाई , भगतानी , भयासनिये , भहकानी , भरमेजे , भडेजे , भवाइये , भंगरेजे , भठेजे , भट्यानी , भकरिये भमानी ,भसीजे , भमरेजे , भभवानिये , भकनेजे , भनीजे , भवेसेजह , भभंवई , भभरानी , भटनेरी , भभराने , भगेडे , भंम्‍भेले , भडनाबी , भडारिये , भाटिया , भागजई , भातेफतहेजा , भानिये , भाठे , भिराणी , भिंड , भालिये , भावने , भालने , भारवाही , भुडानी , भुड्डी , भूतने , भुलाने , भुचानी , भुटेजा , भुडिया , भुगी , भुड्डी , भूसे , भुसरी , भुट्ठे , भेदानी , भोरानिये , भोलाने , भोडे , भोरपालने , भायानी , भुसाझी , मरग , मर्गचावने , महाबंद , मनगंदे , मनीचे , मगवाने , मरकने , मलिक , महंदीरते , मगंलानी ,मदान , मच्‍छड , मक्‍कड , मनिहारा , मनह , मलूजे , मलहोत्रे , मतोके , मठरे , मझटयार , मकरानी , महगड , मगलूजा , मगमछेर , मरवाइये , मडनेजे , मगलानी , महतानी , मंजी , मनडे , मडीजे , मलर , मकानी ,मानकटाहले ,मओंपोत्रे, मानिये , माटे , माठ , मक्‍मा , मरानमगों , मिठे , मुरादाबादी , मुधीजे , मुखरे , मुझारने , मुरादे , मुहंवाल , मुजाल , मुखीजे , मुजराल , मीरांरन , मणूजा , माणकटेला , मेकमदन , मेदराह , मेंडे , मोलीवाडे , मोहरिये , मोगले , मोलरे , मोले , मोंगे , मोटे , मोरणी , मोरलिया , मुअेजा , मुंडा , मुराका , मीठाणी , मुदियान , मुराला , मुलतानी ।।




सोमवार, 3 मई 2010

अरोड वंश की कुल 962 अल्‍लों का संकलन किया जा सका है( भाग - 5) ... खत्री सोहन लाल बजाज



तवर्ग से शुरू होने वाले अल्‍ल .............


तपंगर , तंचे , तलवार , तकोजे , ततरेजे, तरबानी , तखतोला , तरीकिए , तांगा , ताबडे , तानेवली , ताकरा ,तातने , तुरीजे , तेजा , तोलबाटरिन , तरवानी , तनेजे , तरपके , तलोजे , तमेजा , तांगिए , तगतोड , तागडे , तरोने , ताने , तांगेल , तारा , तिलूका , तीगरे , तिगडे , तीने , तह्ररी , तोते तोतलानी , तोबरेजे , तोतवाणी , थथडे , थरेजे , थाथरी , दाहोरा , दरगन , दरजे , दमकतरे , दहरानी , दहोचा , दागडी , दादरे , दाहोले , दाहडे , दारले , दानिये , दाबडे , दिंगा , दुम्‍बवाल , दुधावने , दुरीजे , देजे , देमला , दोहूजे , दोबरेजे , दोल , दोये , दोखरे , दीपे , दहूजा , दय , दरगाना , धरमेरे , धमीजे , धगलानी , धरयानी , धरकबंदिये , धरकमार , धगबाली , धरेजे , धतूरिये , धूमरे , धुनी , धुडिया , धींगडे , धोन , धवन , धरमोहा , नचाती , नगई , नगरानी , नहमंदी , नरूले , नगंरेजे , नारग , नागपाल , नागिये , निवानी , नार्गे , नागुरू , नागरे , नालवा , नासवा , नण्‍दवाने , नासा , निवाहिये , निओले , नेमके , नोगराही , नोरोजे , नोगरे ।


('खत्री हितैषी' के स्‍वर्ण जयंती विशेषांक से साभार)








शनिवार, 1 मई 2010

अरोड वंश की कुल 962 अल्‍लों का संकलन किया जा सका है( भाग - 4) ... खत्री सोहन लाल बजाज



टवर्ग से शुरू होने वाले अल्‍ल .............


टक्‍कर , टकरेजेटढयानी , टनोजिये , टांडरे , टाटरेजे, टाटरा , टारिये , टेजे , टनाका , टंडन , टिंकू , ठक्‍कर , ठकनोजिये , ठकराल , ठठयारे , ठढई , ठुकरालिया , ठठानीवारे , ठाठभूरे , ठुकरेजा , ठांड , ठुड्डी ,ठठराल , ठाकरे , ठांभरे , डड्ढी , डहे , डांग , डागरी , डड्डग , डावरे , डूंगर , डूमरे , डंगडाई , डूमने , डोडे , डींगरे , डटाइये , डरेजे , डेवरी , डंडीडेजा , डडोहे , डोमेजे , डोडेजे , डोडेचा , ढटावरजे , ढटावने , ढंगढेरे , ढयराना , ढाढवानिये , ढाभीणा , ढाण्‍डे , ढोलानी , ढानिये , ढमला 


('खत्री हितैषी' के स्‍वर्ण जयंती विशेषांक से साभार)






अरोड वंश की कुल 962 अल्‍लों का संकलन किया जा सका है( भाग - 3) ... खत्री सोहन लाल बजाज

चवर्ग से शुरू होने वाले अल्‍ल .............
चटकारे , चलतर , चडे , चटयानिये , चचक , चचरे , चनन , चोले , चराई , चोत्रे , चगाये , चंदानी , चटाके, चकने , चनन , चाहल , चावे चावले , चांदना, चिलडे, चिलाने , चुघ , चुग , चुण्‍ड  चुगतिवे , चुटकानी , चुकियारा , चोवरे , चोथानी , चुटानी , चोतडे , चोटीकपा , चोटीपद , चोटमुरादे , चहगे , चकड , चनबाद , चराये , चानने , चौभा , चौपे , चभरा , चोटलद , छलबेजे , छलडारा , छपरे , छकड , छबीले , छहडा, छाबडे , छूत , छताती , छैल , छोरे , छतोडा , छेतीया , छोकरे , छोडे , छहरिया , छक्‍का , जसोवे , जनीचावला , जपे , जमरेजे , जगरान , जनवेजे , जतबानी , जन्‍नी , जाकन , जाका , जाजीखेल , जावा , जाजे , जांदनी , जांजीचांद , जायखलाडी , जुगे , जुलाहे , जुनेजे , जेसिघिए , जेसगही , जौरबानी , जोथे , जोखाने , जोसींगे , जैसघडी , जौभी , जेरवाणी , झझर , झांकरे , झंकारा , झांव , झाम , झाममारा , झमाणी ,

('खत्री हितैषी' के स्‍वर्ण जयंती विशेषांक से साभार)

क्‍या ईश्‍वर ने शूद्रो को सेवा करने के लिए ही जन्‍म दिया था ??

शूद्र कौन थे प्रारम्भ में वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर थी, पर धीरे-धीरे यह व्यवस्था जन्म आधारित होने लगी । पहले वर्ण के लोग विद्या , द...