Friday, 27 August 2010

हमारे मान्‍य देवी देवता ... भाग 3 ... श्री लक्ष्‍मी नारायण टंडन जी

दोनो अंको में आपने पढा .... इन देवी देवताओं के अतिरिक्‍त संस्‍कारों के समय नवग्रहों की पूजा होती है। सूर्य नवग्रहों में प्रमुख हैं। कोई भी धार्मिक कृत्‍य नवग्रहों के बिना पूरा नहीं होता। सूर्य का महत्‍व पृथ्‍वी और उसके जीवन के लिए कितना है तथा मनुष्‍य के भाग्‍य पर नवग्रहों का प्रभाव कितना है , यह सर्वविदित है। सेठों के यहां गर्भवती स्‍त्री के लिए 'बुड्ढे बाबू' की पूजा भी वास्‍तव में सूर्य की पूजा है। यूं भी प्रत्‍येक दिन स्‍नान के बाद हिंदू सूर्य को अर्घ्‍य देते हैं। सूर्य प्राणयाम या सूर्य नमसकार भी पूजा और व्‍यायाम के मुख्‍य अंग हैं। वैसे ही चंद्रमा का नवग्रहों में द्वितीय स्‍थान है। जैसे रविवार को हिंदू व्रत रखते हैं , वैसे ही चंद्रवार को भी रखते हैं। प्रतयेक संस्‍कार में सूर्य की भांति चंद्र की भी पूजा आवश्‍यक है। करवा चौथ , शरद पूनो , गणेश चौथ आदि में चं्रदमा का ही पूजन होता है। सूर्य बल , शक्ति , प्रताप तथा तेज के दाता हैं। रूद्र या मंगल युद्ध के देवता हैं। बुध बुद्धि विद्या का देवता है। बृहस्‍पति संपत्ति समृद्धि तथा वाक् शक्ति के देवता हैं। शुक्र धन , प्रतिभा , प्रेम तथा वैभव के देवता हैं। शनि , राहू और केतु अशुभ ग्रह समझे जाते हैं। इनकी कोपदृष्टि न पउे , ये देव रूष्‍ट न हों , यही सोंचकर संस्‍कारों के समय इनका पूजन होता है।
नवग्रहों के अतिरिक्‍त पंचतत्‍वों की भी पूजा खत्री जाति के संस्‍कारों तथा अन्‍य धार्मिक कृत्‍यों के अवसर पर होती है। अग्नि तथा जल की पूजा विशेष तौर पर होती है। अग्निदेव की संतुष्टि के लिए यज्ञ तथा हवन करना प्रत्‍येक उत्‍सव में आवश्‍यक है। प्रत्‍येक धर्मभीरू हिंदू सुबह शाम अग्निहोत्र करता है। भोजन करने के पूर्व एक रोटी और थोडा सा दाल चावल चूल्‍हें में डाल दिया जाता है। यह अग्निदेव के प्रति समर्पण है। अब भी पुराने विचारों के कुछ वृद्ध धार्मिक कृत्‍य पंच महायज्ञ करते हैं। नगरकोट में ज्‍वाला की ज्‍योति की पूजा , होलिका दहन में अग्नि की पूजा , दुर्गाअष्‍टमी आदि दिनों में प्रचलित पूजा सब अग्निदेव की ही पूजा है। विवाह संस्‍कार पर तो केवल हवन और यज्ञ नहीं होता है , वरन् अग्निदेव पति और पत्‍नी के संबंध के साक्षी स्‍वरूप माने जाते हैं। एक विशेष प्रकार की लकडी से अग्नि उत्‍पन्‍न करके जो अग्नि आधान कहलाती है , अनेक संस्‍कारों में अग्निदेव की पूजारूपी हवन होता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि नित्‍य हवन किया करते थे , अब भी कछ धर्मात्‍मा हिंदू नित्‍य हवन किया करते हैं। हमारे धर्मग्रंथो में अग्निपूजा का बहुत महत्‍व है , प्राचीन आर्य तो अग्नि जल और प्रकृति के अन्‍य अवयवों के पूजक थे ही और उनके वंशज होने के नाते समस्‍त रीति रिवाज हम अपनाए हुए हैं।
अग्नि के अतिरिक्‍त जल की पूजा भी प्रत्‍येक धार्मिक कृत्‍य में होती है। पवित्र मंत्रो द्वारा इंद्र का आह्वान हर संस्‍कारों के अवसर पर होता है। गंगासागर में स्‍नान का महत्‍व सर्वविदित है। गंगा जी हमारे यहां माता कहलाती हैं। महानदी , गोदावरी , कृष्‍णा , कावेरी , नर्मदा , ताप्‍ती , यमुना , सरस्‍वती , सरयु आदि सब नदियां हमारे यहां पवित्र मानी जाती हैं। संस्‍कारों के समय वैदिक मंत्रो द्वारा इन पवित्र नदियों का ीाी आह्वान किया जाता है। जल के देवता वरूणदेव की पूजा और समुद्र स्‍नान का भी हमारे यहां बडा महत्‍व है। जगन्‍नाथपुरी में समुद्रद्वार तथा दक्षिण में कन्‍याकुमारी आदि में समुद्र स्‍नन आदि का बडा महत्‍व है। सारस्‍वत ऋषियों ने सरस्‍वती नदी के तट पर ही वेदों का पठन पाठन किया है। गंगातट पर रहकर प्राचीन ऋषियों ने वेद पुराणादि धर्मग्रंथों का प्रचार प्रसार किया। सरस्‍वती नदी के तट पर वेदों के ज्ञान का प्रचार प्रसार हुआ था।  इसलिए सरस्‍वती देवी के रूप में हमारे यहां विद्या ज्ञान और कला की देवी मानी गयी। आज भी गंगा तट पर ही अनेक संस्‍कार किए जाते हैं। मृत्‍यु के समय गंगा जल या तुलसीदल का प्रयोग होता है। मृत्‍यु के पश्‍चात अस्थियां गंगा जलमें ही विसर्जित होती हैं। गंगा से कृषकों को कितना लाभ होता था , गंगा आवागमन का उन दिनों कितनी अच्‍छी साधन थी , गंगाजल कितना स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक है , आदि भावों से कृतज्ञता के रूप में हिंदुओं ने उनकी पूजा आरंभ की। हम कितने उदार थे , उपकारी के लिए कृताता का भाव प्रकट करना हमारी प्रकृति में था , चाहे वो जड हो या चेतन।

2 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

संगीता जी , नमस्कार
भारतीय संस्कृति में सभी विधि पूजा आदि का विशेष महत्तव है, पर शायद
आज कल के युवा इन बातो को पेरने रीती रिवाज कहकर इनका मजाक उधाते है ....
....
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com

गंगा के विषय में कुछ यहाँ भी पढ़े अच्छा लिखा है ..........
http://oshotheone.blogspot.com/2010/08/blog-post_20.html

Bhushan said...

मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद. पहली बार आपका ब्लॉग देखा है. बहुत-बहुत बधाई. आपका संदेश मैंने रंगकर्मी ज़ुल्फ़िकार को फोन पर दे दिया है. उन्होंने ने सभी बलॉग देखने वालों को 'थिएटर एज' में आने का न्यौता दिया है. आपने अपने समाज के लिए कुछ करने का बीड़ा उठाया है यह भी धर्म है.

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