Saturday, 23 January 2010

पुत्री के प्रति माता पिता का आज क्‍या दायित्‍व है ??

आज भी अधिकांश परिवारों में अपने लडकों के कैरियर और व्‍यक्तित्‍व विकास पर पूरा ध्‍यान दिया जाता है और लडकी के लिए माता पिता की इच्‍छा सिर्फ उसके अच्‍छे घर वर में विवाह करने की ही होती है। अपने प्रति होनेवाले  इस व्‍यवहार से लडकी इतनी दब्‍बू और संकोची हो जाती है कि हीन भावना से ग्रस्‍त होकर चार लोगों का सामना करने में भी सक्षम नहीं हो पाती है। एक के बाद एक लडके उसे जीवनसाथी बनाने से इंकार कर देते हैं, केवल इस वजह से कि उसमें उन गुणों की कमी है , जो लडका अपनी जीवनसाथी में देखना चाहता है , तो माता पिता पर क्‍या गुजरती है ??

आज वह समय नहीं रहा , जब लडके की रजामंदी के बगैर ही बेमेल रिश्‍ते कर दिए जाते थे। तब पर्दे और घूंघट की ओट में लडकी की हर कमी छुपायी जा सकती थी , पर आज माता पिता की भलाई इसी में है कि वे अपनी पुत्री को सर्वगुणसंपन्‍न बनाए, पुत्र से उसे कम न आंके। सुंदरता तो भगवान की दी हुई एक नियामत है , उसपर किसी का वश नहीं होता। अगर आपकी पुत्री सुंदर है तो आप उन सौभाग्‍यशालियों में हैं , जिन्‍हें मैरेज मार्केट में अधिक पापड नहीं बेलने पडेंगे। परंतु यदि पुत्री कम सुंदर है , तो उसमें इतना आत्‍म विश्‍वास भरें कि वह अपनी खूबियों पर गर्व करना सीखे।

कुछ परिवार में पुत्री की स्‍वाभाविक चाह को कुचल दिया जाता है। पुत्र की तरह ही यदि बेटियों को हर घर में माहौल मिल सके और उन्‍हें बेटे से कम आंकना हम छोड दें तो कोई कारण नहीं है कि हमारी पुत्रियां पुत्रों से किसी मायने में कम कहलाएगी। अनेको उदाहरण आज हमारे सामने हैं , जहां पुत्रियों ने पुत्रों की तुलना में बाजी मारी है। हर क्षेत्र में सफलता प्राप्‍त करने वाली लडकियां उन घरों से आती हें , जहां पुत्र और पुत्रियों में कोई भेद भाव नहीं होता है। आज के बदलते परिवेश में हर परिवार के लिए यह समझना आवश्‍यक है कि अब वे पुत्री के जन्‍म का दुख मनाना भूलकर उसके आनेवाले जीवन को खुशहाल बनाने की दिशा में प्रयासरत हो जाएं। वर्ना जो पुत्री अपने जन्‍मदाता माता पिता को सुख देनेवाली बन सकती है , कहीं गलत पालन पोषण से सचमुच अपने माता पिता के लिए एक बोझ न बन जाए !!

लेखक .. खत्री कमल सेठ




4 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Sateek chintan.

Mithilesh dubey said...

सहमत हूँ आपसे ।

anjana said...

बिल्कुल सही कहा आपने ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर ओर अच्छी बात कही आप ने, हमे बेटे ओर बेटी मै भेद भाव बिलकुल नही करन चाहिये, खास कर मां को अपने बचपने से सवक सिखना चाहिये ओर उस गलती हो दोवारा नही दोहराना चाहिये
धन्यवाद

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