Tuesday, 2 February 2010

आज की राजनीति : आवश्‍यकता या मजबूरी

राजनीति का जन्‍म चाणक्‍य की देन है। किसी विषय पर सहमति या असहमति जताकर , नीतिगत निर्णय लेकर उसे परिणाम तक पहुंचा देना ही राजनीति है। पहले राजनीति जनता की भलाई के लिए की जाती थी, परंतु आज तो शायद राजनीति करने भर को ही रह गयी है। राजनीति का स्‍वरूप बिगडकर मात्र विरोध करने और समर्थन देने तक ही सिमटकर रह गया है,चाहे वह विरोध नीतिगत हो या अनीतिपूर्ण हो। आज केवल जनता पर शासन करने की मंशा ही राजनीति है। आज की ये सस्‍ती राजनीति हमारे घर से लेकर अंतर्राष्‍ट्रीय मंच तक देखने को मिल जाएगी। ऐसी राजनीति आज हमारे खून तक आ पहुंची है। आज हम न चाहते हुए भी हर क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष या परोक्ष रूप से राजनीति से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।

1947 की आजादी के बाद टूटे फूटे भारत को फिर से खडा करने के लिए हमारे बुद्धिजीवियों ने जो खाका तैयार किया , उसका अच्‍छा या बुरा जो भी परिणाम आया वो हमारे सामने है। सरदार पटेल की दृढ इच्‍छा शक्ति अगर काम न करती तो इस देश के न जाने कितने टुकडे होते। पर हमारा देश आज विश्‍व का सबसे बडा लोकतंत्र है , जिसे विश्‍व समुदाय एक उपमहाद्वीप के रूप में संबोधित करता है। ऐसी कौन सी बुराई हमारे देश में आज भी विद्यमान है , जिसके कारण हम सभी भारतीय केवल भारतीय नहीं बन पाते।

हम आज भी हिंदू मुस्लिम के नाम से लडते हैं , अगाडी और पिछडा वर्ग के नाम पर बंटे हुए हैं , जाति के नाम पर अलग अलग सोंच रखते हैं , क्‍यूं न हम अपने भारतीय होने पर गर्व करें ? हम केवल भारतीय कब बन पाएंगे ? ऐसी राजनीति हमारे देश में कब जन्‍म लेगी ? क्‍या फिर देश में कोई चाणक्‍य पैदा होगा , जो आज की राजनीति का अध्‍याय समाप्‍त कर नीतिगत , रचनात्‍मक राजनीति का नया अध्‍याय , नया आयाम शुरू करेगा ?
आज की राजनीति आज के नेताओं के लिए एक आवश्‍यकता मात्र हो सकती है , परंतु आम जनता के लिए यह एक मजबूरी मात्र है , जिसे आम जनता आंख मूंदकर ढोने को बाध्‍य हैं।

लेखिका ... पूनम जोधपुरी

4 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

उत्तम... आभार.

Udan Tashtari said...

आम जनता की मजबूरी है-सही कहा!

अरूण साथी said...

nice

vedvyathit said...

raj niti ke chahre kitne hain veebhtd ghne hote
kya kr skte un ka ve sb kuchh se upr hote
kuchh bhi kh lo frk nhi hai asr nhi pdta un pr
kaise 2 neta dekho stta pr kabijn hote

angrejon se udhr ka snvidhan bna dala
kaise sasn ho neta ka aisa tntr bna dala
tntr 2pr bhari hain ye jn ke neta ji dekho
kyonki sasn ko neta ne apne liye bna dala
dr.vedvyathit@gmail.com

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